Archive for April, 2021

मैं और मेरा मौन

Friday, April 23rd, 2021

मैं और मेरा मौन मैं और मेरा मौन जब सम्मुख होता जीवन मेरा इक- इक पन्ना उद्धृत होता प्रज्ञा चक्षु टोह कर भीतर प्रदीप्त होता शाश्वत रचना की नींव प्रतिपादित करता मैं और मेरा मौन—जब सम्मुख होता!! प्रकाश पुंज नैन द्वार से प्रविष्ट होता समय के कटिबद्ध आलोकित करता पिघलते हुए दर्द की परछाईं हटाता […]

Language of Eyes

Saturday, April 17th, 2021

Without opening the mouth you can read the language of Eyes.

सलेटी बदलियां

Thursday, April 8th, 2021

उग्रवाद का असली चेहरा जो वादी के लोगों को जीने नहीं दे रहा।

हथेली पर सूरज

Sunday, April 4th, 2021

जिंदगी के कष्टों को झेल कर हार नहीं मानना। हौंसले बुलंद करके अपनी हथेली पर सूरज उगा लेना चाहिए अर्थात पराई रोशनी के सहारे नहीं खोजने चाहिए।

तीन चौक्के

Sunday, April 4th, 2021

प्रवासी भारतीय बनने का यह मतलब नहीं कि अपने संस्कार अपने देश के विचार सब भूल जाए। समय-समय पर तीन चौके का समय उसको चेतावनी देने आ जाता था। कभी अच्छी खबर लेकर तो कभी बुरी खबर लेकर। दुख सुख का संगम ही जीवन है।

बालू भित्तिका

Sunday, April 4th, 2021

झूठ के बल पर कोई बात सफल नहीं होती। जैसे रेत के ऊपर इमारत खड़ी नहीं हो सकती।