Archive for March, 2008

सम्मोहन

Thursday, March 13th, 2008

सन अस्सी की बात है| अमेरिका से पीटर, उसकी पत्नी कैरोलीना एवम क्रमशः बारह और दस वर्ष की आयु के उनके दो पुत्र जैक व जैरी कश्मीर आए थे | श्री नगर हवाई अडडे पर पहुँचते ही कश्मीर की ठंडी हवाओं ने उनके तन का स्पर्श किया, तो दिल्ली के तपते जून की तपिश का […]

एक यत्न

Tuesday, March 4th, 2008

नित्य होता शब्दों का नृत्य ख़बरें उड़तीं, चर्चे होते मीडिया बेलगाम जपता आदम हव्वा के किस्से भौतिकता साँस लेती संवेदना लुप्त होती जाती शब्द शक्तिहीन सियाह कालिमा केवल चेहरे पर नाक नहीं हाथों में कलम छोटी हो गई अक्षरों का कद आदमकद से ऊपर उठ गया दिमागों की बत्ती गुल है लावारिस अक्षर सड़क किनारे […]

बसंत झुलना झुलाए

Saturday, March 1st, 2008

तंगदिल हुईं सर्द हवाएं मौसम ने ली अँगड़ाई इक इक क़तरा था सहमा ज़र्रे-ज़र्रे ने तपिश पाई… लिहाफ़ से ढ़ँकी सियाही धवल हुई खोल किवाड़ नन्हे पैरों की पैंजनिया छुन-छुन आँगन का सिंगार.. अब के बसंती पवन लाई कसमसाते तन में उभार आशिकों पे बरसाती पलाश फूल के मेघ-मल्हार.. आए पीली सरसों से लहरा के […]