क्या करना नाम ?

कनिष्ठा,अनामिका,मध्या
तर्जनी चाहे हो अंगुष्ठ
उद्भव हुआ हथेली से
एक माई के जाए लाल!
पाँचों का स्वरूप विभन्न
अलग-थलग अंगूठा संग
अंगूठा सबकाअभिन्न अंग
शंख,पुष्प,चन्द्र पहचान !
स्वभाव निर्मित उंगलियों से
कार्य करे अंगुष्ठ का निशान
सौभाग्य बढ़़ाए भाल पर
त्यौहारों पर टीके से आन !
जब भी बंद हुई मुट्ठी
सबसे नींव गया बाहर रहा
चारों उंगलियों का रक्षक
आँचल में लिया समेट !
एकता का देता सबक
न बिखरो लेकर अहम्
एक हाथ करे सब काम
तभी, क्या करना नाम ?

वीणा विज’उदित’

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