अमेरिकन फुटबॉल गेम

सर्वाधिक लोकप्रिय गेम फुटबॉल
‌ “अमेरिका की फुटबॉल”— यहां की सर्वाधिक लोकप्रिय गेम हैं। जिस तरह हम भारतीयों के वास्तविक हीरो हमारे क्रिकेट के खिलाड़ी हैं, उसी प्रकार अमेरिका के आम आदमी के दिलो-दिमाग पर यहां की फुटबॉल के खिलाड़ी छाए रहते हैं।
कहने को फुटबॉल है– लगता है यह पैर से खेलते होंगे लेकिन इसे हाथ से खेला जाता है। भारत में हम जिसे फुटबॉल कहते हैं बाकी विश्व उसे’साकर’ के नाम से जानता है। फुट केवल पैर ही नहीं एक माप भी है! तभी एक फुट लंबाई होने के कारण इस लंबी रक़बी या बॉल को फुटबॉल कहा जाता है। यह तथ्य लोगों को ज्ञात ना होने पर लोग कहते हैं कि पता नहीं अमेरिकन इसे हैंडबॉल या बॉल क्यों नहीं कहते? वास्तविकता का ज्ञान होना आवश्यक है।
अमेरिका की फुटबॉल गेम को व्यवसायिक स्तर पर नियंत्रित करने वाली संस्था का नाम ” नेशनल फुटबॉल लीग” है । इसी “एन एफ एल” से प्रभावित होकर इंडिया में ” टी 20 ” की टीम बनी है। एन एफ एल की तरह ही हर प्रांत की “एन सी ए ए” कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की टीम भी होती है। खिलाड़ी बदलते रहते हैं क्योंकि ग्रेजुएशन के बाद खिलाड़ी कॉलेज छोड़ जाते हैं। व्यवसायिक फुटबॉल और इनके नियमों में थोड़ा फेरबदल होता है।
यह प्रतिस्पर्धात्मक गेम है जिसमें बहुत शारीरिक शक्ति की आवश्यकता होती है । इसमें भारी सुरक्षात्मक गियर पहनते हैं। इसमें एक एंपायर और तीन से छह अन्य रेफ्री होते हैं। हर टीम का अपना कोच होता है। फुटबॉल के कोच की तनख्वाह राज्य में सबसे अधिक अर्थात करोड़ों में होती है। प्लेयर्स खूब शक्तिशाली होते हैं और उनका कद छै: फीट से भी ऊंचा होता है। ग्यारह खिलाड़ियों की दो टीमें होती हैं जिनमें प्रतिस्पर्धा होती है। हर टीम को दूसरी टीम के ‘एंड जोन’ में पहुंचकर अंक बटोरने होते हैं। जिस टीम को रेफरी गेंद देता है, वह गेंद के साथ दौड़ कर या अपने साथियों में आपस में ही गेंद फेंक कर उसे विरोधी टीम के एंड जोन तक बढ़ाने की कोशिश करता है। यदि उस टीम का कोई खिलाड़ी गेंद पकड़े हुए फील्ड की पीली लकीर को पार करके विरोधी एंड जोन में पहुंच जाता है या एंड जोन के अंदर खड़ा हुआ अपने साथी द्वारा फेंकी गई गेंद को सफलतापूर्वक पकड़ लेता है या फिर मैदान से गोल की लकीर के पीछे बने गोल पोस्ट के बीच से गेंद को क्लिक करके पहुंचा देता है, तो उसकी टीम को अंक मिल जाते हैं।
उधर विरोधी टीम का काम है कि टक्कर मार- मार कर गिरा कर के, बीच में आकर इस फेंकी गई गेंद को हथिया लेना या पकड़कर गेंद पर कब्जा कर लेना और विरोधी टीम को अपनी टीम के एंड जोन की तरफ बढ़ने से रोकना।
यहां अमेरिका में फुटबॉल सीजन के दिनों में “एन एफ एल” की गेम इतवार और सोमवार को होती है जबकि कॉलेज या यूनिवर्सिटी की गेम शनिवार को देखने का चलन है। गेम के शौकीन लोगों के लिए यह बहुत उत्साह के दिन होते हैं मानो कोई त्यौहार मनाया जा रहा हो। किसी एक के घर में इकट्ठे होकर यह लोग गेम देखते हैं फिर खाना भी वहीं इकट्ठे खाते हैं। जो अपनी टीम को जिताना चाहते हैं वह उनकी यूनिफॉर्म के रंग के ही कपड़े पहनकर गेम देखते हैं और शोर-शराबा मचाते हैं। जैसे हम लुज़ियाना स्टेट की “एल एस यू”यानी कि “लुज़ियाना स्टेट यूनिवर्सिटी” टीम की जामनी और पीली ड्रेस पहन कर किसी एक दोस्त के घर गेम देखते हैं या अपने घर दोस्तों को बुला लेते हैं । स्टेडियम में भी लोग गेम देखने जाते हैं।
मेरे इस वर्ष अमेरिका प्रवास के दिनों में बड़े बेटे मोहित ने स्टेडियम में स्वीट लिया था (जिसके लिए अच्छी खासी रकम चंदे में देनी होती है) यानी कि हम बालकनी से फुटबॉल गेम देखने गए थे। यह, वह स्थान और समय होता है, जब बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ वहां आपस में मिलते हैं और बड़े-बड़े बिजनेसमैन आपस में रिश्ते बनाकर डीलें तय करते हैं। राज्य के गवर्नर, मेयर आदि सभी गेम देखने स्वीट्स में आते हैं। वहां सभी ने लुज़ियाना टीम के जामनी कपड़े पहने हुए थे। वहां दूसरी प्रतिद्वंद्वी टीम ‘अलेबामा ‘ प्रांत की थी। उस टीम ने हरी और सफेद यूनिफॉर्म पहनी हुई थी। उस टीम को चीयर करने वाले स्टेडियम के एक तरफ हरे कपड़ों में बैठे हुए थे बाकी और सब जामनी कपड़ों में थे।
जो टीम होस्ट होती है अर्थात जिस राज्य के शहर में गेम हो रही होती है, उसके बैंड और चीयरलीडर्स अपनी यूनिफार्म में गेम से पूर्व खेल के मैदान पर परेड करते हैं। मशाल लेकर दौड़ता हुआ पहले टीम का कैप्टन आता है। वह मशाल जलाकर आगे बढ़ता है उसे स्टैंड पर रखता है। (यहां आपको वीडियो में दिखाई देगा) वहां परेड का बैंड सफेद कपड़ों में था और उसकी धुन बहुत कर्णप्रिय थी। इस बजती धुन पर गोल्डन ड्रेसेस में बहुत सुंदर परियों जैसी चीयरलीडर्स हाथों मैं पकड़े पोम पोम ( छुनछुने) से नृत्य करती आगे बढ़ रही थीं। यह परियां सब का मन मोह लेती हैं । इसके बाद गेम शुरू होती है।
जिस शनिवार हम गेम देखने गए थे वह नवंबर में था। उस दिन बारिश हो रही थी और गजब की ठंड थी लेकिन यह चेयर लीडर्स बिन बाहों की छोटी- छोटी गोल्डन ड्रेस में बहुत सुंदर मन लुभावना दृश्य उपस्थित कर रही थीं। सलाम है इनके जज्बे को। ऊपर स्वीट में गरमा गरम खाने-पीने का इंतजाम भी था और साथ ही बड़े-बड़े टीवी लगे हुए थे। सबसे रोचक बात यह थी कि “एल एस यू “अर्थात लुज़ियाना स्टेट यूनिवर्सिटी की टीम जीत रही थी। खूब शोर मच रहा था और हवा में उत्साह व विजय की उमंग दिखाई पड़ रही थी।
गेम को प्रत्यक्ष देखना बहुत कमाल का अनुभव है। गेम देखने के लिए अमेरिकन लोग पैसे दिल खोलकर खर्च करते हैं, तभी तो फुटबॉल के खिलाड़ियों को करोड़ों में डॉलर मिलते हैं। अमेरिका की फुटबॉल गेम यहां का क्रेज है! लोग दीवाने हैं इसके!!
डा.वीणा विज’उदित’
नवंबर 2022
बैटन रूज-लुज़ियाना
अमेरिका

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